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जंग की आहट थमी, तेल बाजार में बड़ी राहत: 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

Satyakhabarindia

मध्य-पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच वैश्विक तेल बाजार में बड़ी राहत देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में बीते सप्ताह 13% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जो 2020 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। इस गिरावट के पीछे प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत और सीजफायर की घोषणा को माना जा रहा है।

कीमतों में क्यों आई गिरावट?
जब से दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की खबर सामने आई है, निवेशकों की चिंता काफी हद तक कम हो गई है। इससे तेल की सप्लाई को लेकर बना ‘रिस्क प्रीमियम’ घटा है और कीमतों में तेज गिरावट आई है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल और WTI करीब 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट बना केंद्र बिंदु
तेल बाजार की नजर अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी है, जो दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में से एक है। इस जलमार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है। अगर यहां से आपूर्ति सामान्य होती है, तो कीमतों में और गिरावट संभव है।

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विशेषज्ञों की राय
रैपिडन एनर्जी ग्रुप के अध्यक्ष बॉब मैकनैली का मानना है कि मौजूदा गिरावट कुछ हद तक जल्दबाजी में की गई प्रतिक्रिया हो सकती है। उनके अनुसार, बाजार में उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है और स्थिति पूरी तरह स्थिर होने में समय लगेगा।

तेल सप्लाई पर क्या असर?
हालांकि सीजफायर लागू है, लेकिन क्षेत्र में हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। सऊदी अरब ने हाल ही में बताया कि उसकी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन प्रभावित हुई है, जिससे निर्यात पर असर पड़ा है। यह पाइपलाइन लाल सागर के रास्ते तेल सप्लाई का महत्वपूर्ण माध्यम है।

देशों ने खोले तेल भंडार
मध्य-पूर्व पर निर्भर कई देशों ने अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग शुरू कर दिया है। जापान ने मई में 20 दिनों के बराबर तेल जारी करने का फैसला लिया है, जबकि चीन ने अपनी रिफाइनरियों को स्टॉक इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। भारत में भी निजी रिफाइनरियों ने ईंधन वितरण को संतुलित करने के कदम उठाए हैं।

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राजनयिक तनाव अभी भी बरकरार
भले ही हालात कुछ बेहतर हुए हों, लेकिन बयानबाजी का दौर जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिए हैं, वहीं ईरानी नेतृत्व भी अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। इससे साफ है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

तेल की कीमतों में आई यह बड़ी गिरावट बाजार के लिए राहत की खबर जरूर है, लेकिन स्थिरता अभी दूर नजर आती है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता और मध्य-पूर्व के हालात तय करेंगे कि तेल की कीमतें और गिरेंगी या फिर दोबारा बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

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